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विश्वास और महत्व को पर्चा

मंदिर के प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक न्यास का निर्माण किया गया है | इसकी अवधि 5 वर्ष है और इसमें सरकारी और गैर सरकारी व्यक्ति सम्मलित हैं| गैर सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव मंदिर न्यास के आयुक्त द्वारा सरकार को भेज दिए जाते हैं| बिलासपुर उपखंड के सभी पदेन इस न्यास के सदस्य हैं| न्यास की अधिसूचना सरकार से मंजूरी लेने के बाद जिसेकि सरकारी मंदिर आयुक्त (उप आयुक्त, बिलासपुर) द्वारा जारी किया जाता है| श्री नैना देवी जी के गैर सरकारी सदस्यों में, भागीदारों, पुजारियों, नजदिकी पचायत की जनता के प्रतिनिधियों और पंजाब क्षेत्र से कुछ लोग हैं जिनका माता नैना देवी पर असाधारण विश्वास है और जिनकी मंदिर धन और अन्य संसाधन जुटाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है वे लोग शामिल हैं|

बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और मंदिर प्रबंध को ठीक रूप से चलाने के लिए प्रमुख निर्णय न्यास द्वारा ही लिए जाते हैं | न्यास की प्रत्येक बैठक या तो अध्यक्ष और या मंदिर न्यास के मुखिया की अध्यक्षता में की जाती है और कार्रवाई रिपोर्ट मंदिर न्यास आयुक्त को अनुमोदन के लिए भेजी जाती है| बैठक में लिए गए सभी निर्णय आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही लागू किये जाते हैं|