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आस पास के मंदिर

श्री बाबा बालक नाथ मंदिर

श्री बाबा बालक नाथ का धाम दियोटसिद्ध में जिला मुख्यालय हमीरपुर से ४५ कि० मी० दूर बिलासपुर जिला की सीमा रेखा पर एक सुन्दर स्थली है| दियोटसिद्ध जाने का मार्ग शाहतलाई और चक्मोह से होकर है| समुद्रतल से इसकी ऊंचाई ८७० मीटर है| यह स्थान उतारी भारत का एक दिव्य सिद्ध पीठ है जहाँ सिद्धबाबा बालक नाथ की पवित्र गुफा है|
हम यहाँ बस,ट्रेन और हवाई रास्ते से पहुँच सकते हैं|

गुरु का लाहौर

गुरु का लाहौर जिला बिलासपुर में आनंदपुर साहिब पंजाब से १२ किलोमीटर दूरी पर स्थित है| यह तीन लोकप्रिय गुरुद्वारों का समूह है| ये तीन गुरद्वारे त्रिवेणी साहिब, गुरुद्वारा पुर साहिब और गुरुद्वारा सेहरा साहिब हैं|
यह समूह "लाहौर" की तरह बनाने के लिए गठित किया गया था क्योंकि गुरु की शादी के लिए लाहौर जाना राजनैतिक रूप से ठीक नहीं था| इसीलिए गुरु गोबिंद सिंह जी कि शादी जीत कौर के साथ १७३४ में इसी स्थान पर हुई|

कीरतपुर साहिब

कीरतपुर साहिब १६२७ में गुरु हर गोबिंद जी द्वारा बनाया गया था| यहाँ पाताल पुरी स्थित है जो सिखों द्वारा उनके मृतकों की राख लेने का स्थान है| यह सतलुज नदी के तट पर नंगल-रूपनगर-चंडीगढ़ मार्ग पर स्थित है| कीरतपुर साहिब सिखों के लिए एक पवित्र स्थान है क्योंकि एक लोककथा के अनुसार गुरु नानक देव यहाँ का दौरा किया जब यह स्थान ज्यादा विकसित नहीं हुआ था|

 

आनंदपुर साहिब

आनंदपुर साहिब पंजाब के जिला रूपनगर में स्थित है और सिखों के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है| यह वर्ष १६६५ में गुरु तेग बहादुर द्वारा स्थापित किया गया| यहाँ पर होली का त्यौहार "होला मोहल्ला" नाम श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिया गया और हर साल १,००,००० से भी अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है|

बाबा नाहर सिंह जी मंदिर

बाबा नाहर सिंह मंदिर गोबिंद सागर झील के तट पर स्थित है जोकि धोल्रा और बजिया मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है | यह बिलासपुर जिले के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है| बाबा नाहर सिंह खुद पीपल वाला, बजिया और डालियान वाला के रूप में जाने जाते थे|यह मंदिर कुल्लू की रानी द्वारा बाबा नाहर सिंह के सम्मान में बनवाया गया था|